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ज़रूर। माँ दुर्गा की पूजा की शुरुआत की कथा धार्मिक परंपरा और ऐतिहासिक प्रमाण—दोनों दृष्टिकोणों से समझना उपयोगी है।

ज़रूर। माँ दुर्गा की पूजा की शुरुआत की कथा धार्मिक परंपरा और ऐतिहासिक प्रमाण—दोनों दृष्टिकोणों से समझना उपयोगी है। माँ दुर्गा पूजा की शुरुआत की कथा हिंदू पुराणों के अनुसार, महिषासुर नामक असुर ने कठोर तपस्या करके वरदान प्राप्त किया और देवताओं तथा मनुष्यों को परेशान करने लगा। उसे ऐसा वरदान मिला था कि कोई पुरुष उसे मार नहीं सकेगा। महिषासुर के अत्याचार से देवता चिंतित हुए। तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश सहित देवताओं की शक्तियों से एक दिव्य देवी का प्राकट्य हुआ। यही देवी दुर्गा कहलायीं। प्रत्येक देवता ने उन्हें अपने-अपने दिव्य अस्त्र दिए। देवी दुर्गा ने महिषासुर से युद्ध किया और अंततः उसका वध किया। इस विजय को अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि और दुर्गा पूजा दुर्गा की उपासना की परंपरा बहुत प्राचीन है। देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती), जो मार्कंडेय पुराण का हिस्सा है, देवी दुर्गा और महिषासुर के युद्ध की प्रमुख धार्मिक कथा प्रस्तुत करता है। बंगाल और पूर्वी भारत में जिस रूप में आज शारदीय दुर्गा पूजा मनाई जाती है, उसका विकास कई शताब्दियों में हुआ। परंपरागत कथाओ...